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October 20, 2026

IFWJ ने दिल्ली प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों के साथ हुई हिंसा और उत्पीड़न की निंदा की है; दिल्ली पुलिस तथा सरकार की एडवाइज़री को देखते हुए दिल्ली का स्थापना दिवस आयोजन स्थगित

पत्रकार सुरक्षा कानून, वैधानिक ढाँचे की बहाली और पत्रकारों के राष्ट्रीय रजिस्टर की माँग दोहराई

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IFWJ ने दिल्ली प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों के साथ हुई हिंसा और उत्पीड़न की निंदा की है; दिल्ली पुलिस तथा सरकार की एडवाइज़री को देखते हुए दिल्ली का स्थापना दिवस आयोजन स्थगित; पत्रकार सुरक्षा कानून, वैधानिक ढाँचे की बहाली और पत्रकारों के राष्ट्रीय रजिस्टर की माँग दोहराई


इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) 10 से 15 अक्टूबर 2026 के बीच नई दिल्ली में प्रदर्शनों की कवरेज कर रहे पत्रकारों की हिरासत, मारपीट, उत्पीड़न किए जाने और कार्य में बाधा की ख़बरों पर गंभीर चिंता व्यक्त करता है। सार्वजनिक घटनाओं की निर्भीक और स्वतंत्र रिपोर्टिंग करना पत्रकारों का संवैधानिक एवं पेशेवर दायित्व है। प्रदर्शन के औचित्य पर चाहे जो राय हो, किसी भी पत्रकार को मनमाने ढंग से हिरासत में लेना, उस पर हमला करना या उसे वैध कार्य करने से रोकना स्वीकार्य नहीं है। IFWJ 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च को भी अनुचित मानता है, क्योंकि लंबित न्यायिक मामलों से जुड़ी शिकायतों का समाधान स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं से होना चाहिए। परंतु किसी प्रदर्शन से असहमति हिंसा, अत्यधिक बल-प्रयोग या प्रेस पर पाबंदी को कभी उचित नहीं ठहराती।

स्थापना दिवस कार्यक्रम स्थगित

IFWJ ने 28 अक्टूबर को जंतर मंतर पर अपना स्थापना दिवस मनाने की योजना बनाई थी, जिसमें राज्य इकाइयों के एक हज़ार से अधिक पत्रकारों के शामिल होने की अपेक्षा थी। राजधानी की स्थिति और दिल्ली पुलिस तथा सरकार की एडवाइज़री को देखते हुए दिल्ली का केंद्रीय कार्यक्रम स्थगित किया जाता है। स्थापना दिवस 28 अक्टूबर को ही देश भर में IFWJ के राज्य मुख्यालयों पर मनाया जाएगा, और इस वर्ष के अंत में दिल्ली में एक संयुक्त राष्ट्रीय समारोह होगा, जिसमें सभी राज्यों के पत्रकार भाग ले सकेंगे।

दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान उपजी चिंताएँ

कम से कम 30 पत्रकारों, जिनमें फ्रीलांसर तथा भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के संवाददाता शामिल थे, को कथित रूप से 10-11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने अपनी पत्रकार पहचान बताने के बावजूद हिरासत में लिया। IFWJ प्रत्येक हिरासत के कानूनी आधार, अवधि और वर्तमान स्थिति का सार्वजनिक ब्योरा माँगता है।

महिला पत्रकारों की सुरक्षा

यौन उत्पीड़न और धमकाने के आरोप तत्काल दर्ज किए जाने चाहिए और उनकी निष्पक्ष एवं संवेदनशील जाँच होनी चाहिए। संज्ञेय अपराधों में FIR दर्ज करने में देरी गंभीर चिंता का विषय है। IFWJ वन-इंडिया की पत्रकार रिचा पराशर की उस शिकायत का संज्ञान लेता है कि 12 अक्टूबर के मार्च के दौरान सुप्रीम कोर्ट के पास उनके साथ बदसलूकी की गई। हम निष्पक्ष जाँच, सीसीटीवी और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा प्रतिशोध से सुरक्षा की माँग करते हैं। मामले का निर्णय साक्ष्यों के आधार पर और कानून के अनुसार होना चाहिए।

पत्रकार सुरक्षा कानून: समय की माँग

IFWJ एक व्यापक पत्रकार सुरक्षा कानून की अपनी पुरानी माँग दोहराता है। पत्रकार एक सार्वजनिक दायित्व निभाते हुए विशिष्ट जोखिमों का सामना करते हैं, चाहे वे प्रदर्शन स्थलों, आपदा क्षेत्रों, संघर्ष क्षेत्रों, न्यायालय परिसरों से रिपोर्टिंग कर रहे हों या ऐसे स्थानों से जहाँ शक्तिशाली राजनीतिक, व्यावसायिक या प्रशासनिक हित जुड़े हों।

यह कानून सार्वजनिक व्यवस्था की कीमत पर विशेषाधिकार पैदा करने वाला नहीं होना चाहिए। उसे ऐसा व्यावहारिक ढाँचा देना चाहिए जिसमें पत्रकार बिना मनमानी रुकावट के काम कर सकें और साथ ही कानून के प्रति पूरी तरह जवाबदेह रहें। IFWJ का प्रस्ताव है:

"कार्यरत पत्रकार" की स्पष्ट परिभाषा, जिसमें स्थायी, अनुबंधित, फ्रीलांस, क्षेत्रीय भाषा, डिजिटल और स्वतंत्र पत्रकार शामिल हों, जो सत्यापन योग्य कार्य करते हैं।

हमले, यौन उत्पीड़न, धमकी, गैरकानूनी हिरासत तथा पेशेवर उपकरणों के विनाश या ज़ब्ती से सुरक्षा।

पत्रकार की पहचान सत्यापित करने के लिए अनिवार्य पुलिस प्रोटोकॉल, जिसमें संस्थागत पहचान-पत्र, प्रेस-यूनियन कार्ड, संपादक का प्रमाणपत्र या राष्ट्रीय रजिस्टर मान्य हों, केवल PIB मान्यता नहीं।

FIR का समयबद्ध पंजीकरण और पुलिस या राजनीतिक पदाधिकारियों पर कदाचार के आरोप की स्थिति में स्वतंत्र जाँच।

गोपनीय सूत्रों की सुरक्षा, केवल संवैधानिक रूप से वैध न्यायिक प्रक्रिया के अधीन।

कर्तव्य निर्वहन के दौरान घायल, दिव्यांग या मारे गए पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए मुआवज़ा, चिकित्सा सहायता और कल्याण सहयोग।

शिकायत निवारण, सुरक्षा उपायों, सामाजिक सुरक्षा और क्रियान्वयन की निगरानी के लिए राष्ट्रीय पत्रकार परिषद बनाया जाये।

ये सुरक्षाएँ दान या प्रशासनिक विवेक का विषय नहीं हैं; ये अनुच्छेद 19 के अंतर्गत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए अनिवार्य हैं।

कार्यरत पत्रकार अधिनियमों की समाप्ति और वैधानिक ढाँचे की बहाली

पत्रकारों और रील बनाने वालों एवं प्रभावकों (इन्फ्लुएंसरों) में अंतर कर पाने की कठिनाई एक नीतिगत विफलता भी है। दशकों तक कार्यरत पत्रकार अधिनियम, 1955 और कार्यरत पत्रकार (मज़दूरी की दरों का निर्धारण) अधिनियम, 1958 ने पत्रकारों को अलग वैधानिक पहचान दी और वेतन, सेवा शर्तों, अवकाश, ग्रेच्युटी तथा बकाया वसूली में संरक्षण प्रदान किया था। व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य-स्थिति संहिता, 2020 ने 21 नवंबर 2025 से दोनों अधिनियमों को निरस्त कर दिया। इससे पत्रकारिता एक सामान्य श्रम ढाँचे में आ गई, जिसमें वेतन संरक्षण, सेवा सुरक्षा या शिकायत निवारण के लिए पत्रकारिता-विशिष्ट कोई व्यवस्था नहीं है। यदि राज्य अपेक्षा करता है कि पुलिस, अदालतें और नियोक्ता पत्रकार और इन्फ्लुएंसर में भेद करें, तो उसे पहले ऐसा करने का वैध, पारदर्शी और एकसमान आधार उपलब्ध कराना होगा।

पत्रकारों का राष्ट्रीय रजिस्टर

(माननीय सर्वोच्च न्यायालय में व्यक्त इस भावना के संदर्भ में कि "पत्रकारों को रील बनाने वालों या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों से अलग पहचानना कठिन है।")

IFWJ इसी कारण से लंबे समय से पत्रकारों के राष्ट्रीय रजिस्टर की माँग करता रहा है। यह लाइसेंसिंग, सेंसरशिप या राजनीतिक छंटनी का औज़ार नहीं बनना चाहिए। यह एक पारदर्शी, अधिकार-आधारित सत्यापन प्रणाली होनी चाहिए जो वैध पत्रकारों को राज्यों और प्लेटफ़ॉर्मों में पहचान दिलाए। इसमें शामिल होना चाहिए:

एक विशिष्ट पत्रकार पहचान संख्या।

किसी पंजीकृत मीडिया संगठन, प्रेस क्लब, मान्यता प्राप्त पत्रकार यूनियन से जुड़ाव या प्रलेखित स्वतंत्र कार्य का सत्यापन।

स्टाफ पत्रकार, फ्रीलांसर, डिजिटल पत्रकार, फोटो-पत्रकार, कैमरा पर्सन, संपादक और क्षेत्रीय भाषा के संवाददाताओं की स्पष्ट श्रेणियाँ।

गोपनीयता और डेटा संरक्षण के उपाय, अस्वीकृति के विरुद्ध अपील का अधिकार और समय-समय पर नवीनीकरण।

ऐसा तंत्र जो केवल असत्यापित, पक्षपातपूर्ण या व्यावसायिक सामग्री निर्माण में लगे व्यक्तियों को पत्रकार-सुरक्षा का दावा करने से रोके।

यह रजिस्टर पुलिस, अदालतों और सरकारी विभागों को वास्तविक पत्रकारों की पहचान में मदद करेगा और प्रेस की स्वतंत्रता को केवल PIB मान्यता तक सीमित नहीं करेगा। यह सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही में उठी उस चिंता का भी समाधान करेगा कि मान्यता प्राप्त पत्रकारों, फ्रीलांसरों, इन्फ्लुएंसरों और कंटेंट क्रिएटरों में अंतर करना कठिन है और अलग-अलग श्रेणियों को अलग सुरक्षा की आवश्यकता हो सकती है।

IFWJ नेतृत्व के वक्तव्य

IFWJ के अध्यक्ष गोपाल मिश्रा ने कहा कि दिल्ली की स्थिति और आधिकारिक एडवाइज़री को देखते हुए फेडरेशन ने जंतर मंतर पर 28 अक्टूबर का स्थापना दिवस कार्यक्रम स्थगित किया है, राज्य इकाइयाँ इसे अपने मुख्यालयों पर मनाएँगी और राष्ट्रीय समारोह बाद में होगा। उन्होंने महिला पत्रकारों के यौन उत्पीड़न और धमकाने के आरोपों की निष्पक्ष जाँच, FIR के तत्काल पंजीकरण और निष्पक्ष एवं संवेदनशील जाँच, तथा पत्रकार रिचा पराशर की शिकायत पर शीघ्र कार्रवाई की माँग की, जिसमें सीसीटीवी और डिजिटल साक्ष्यों का संरक्षण तथा प्रतिशोध से सुरक्षा शामिल है। उन्होंने पत्रकार सुरक्षा कानून, कार्यरत पत्रकारों के लिए वैधानिक ढाँचे की बहाली और पत्रकारों के राष्ट्रीय रजिस्टर की IFWJ की माँगें भी दोहराईं।

उपाध्यक्षों उपेंद्र सिंह राठौर, मोहन कुमार, जीo भूपति और प्रेमकांत तिवारी ने कहा कि आधिकारिक एडवाइज़री को देखते हुए दिल्ली का कार्यक्रम ज़िम्मेदारी से स्थगित किया गया है, राज्य इकाइयाँ 28 अक्टूबर को अपने मुख्यालयों पर कार्यक्रम करेंगी और उसके बाद राष्ट्रीय आयोजन होगा। राठौर ने रिचा पराशर की शिकायत की निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित जाँच की माँग की। मोहन कुमार ने कहा कि महिला पत्रकारों की सुरक्षा और गरिमा पर कोई समझौता नहीं हो सकता, उत्पीड़न या धमकी के आरोप तुरंत दर्ज होने चाहिए और संवेदनशीलता से जाँचे जाने चाहिए, तथा पराशर मामले का निर्णय कड़ाई से साक्ष्यों और कानून के अनुसार होना चाहिए। प्रेमकांत तिवारी ने कहा कि संज्ञेय अपराधों में FIR दर्ज करने में देरी गंभीर चिंता का विषय है, महिला पत्रकारों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए और जाँच राजनीतिक प्रभाव तथा चरित्र हनन से मुक्त रहकर होनी चाहिए। उपाध्यक्ष जीo भूपति ने कहा कि भारत को प्रिंट, प्रसारण, डिजिटल, फ्रीलांस और स्वतंत्र पत्रकारों को हिंसा, धमकी, गैरकानूनी निगरानी और प्रतिशोध से बचाने वाले व्यापक पत्रकार सुरक्षा कानून की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि IFWJ निरस्त हो चुके पुराने कार्यरत पत्रकार अधिनियम के स्थान पर नया वैधानिक ढाँचा तथा पारदर्शी राष्ट्रीय पत्रकार रजिस्टर बनाने की माँग करता है, ताकि मान्यता और कल्याण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने याद दिलाया कि ये माँगें 2016 में जैसलमेर, राजस्थान में संगठन के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. के. विक्रम राव द्वारा उठाई गई थीं।

सचिवों परमेश्वर राव और सौरव पटनायक ने भी सेवा शर्तों और मान्यता पर इन माँगों का समर्थन किया। परमेश्वर राव ने निरस्त हो चुके कार्यरत पत्रकार अधिनियम, 1955 के स्थान पर आज की मीडिया वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने वाले आधुनिक कानून की माँग की, जो डिजिटल, फ्रीलांस और स्वतंत्र मीडियाकर्मियों सहित सभी पत्रकारों की सेवा शर्तों, वेतन, गरिमा और पेशेवर स्वतंत्रता की प्रभावी संस्थागत और कानूनी सुरक्षा के साथ रक्षा करे। पटनायक ने कहा कि पारदर्शी मान्यता, कल्याण, बीमा, सुरक्षा और संस्थागत सहयोग के लिए पत्रकारों का राष्ट्रीय रजिस्टर आवश्यक है और इसे प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल तथा स्वतंत्र मीडिया को समेटते हुए निष्पक्ष, विवेकाधीन न होने वाली और अधिकार-आधारित प्रक्रिया से बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से बिना विलंब और बिना राजनीतिक विवेक के आगे बढ़ने का आग्रह किया।

IFWJ की राज्य इकाइयों के अध्यक्षों ने घोषणा की कि स्थापना दिवस 28 अक्टूबर को उनके अपने राज्य मुख्यालयों पर मनाया जाएगा, और बताया कि आधिकारिक एडवाइज़री को देखते हुए दिल्ली का केंद्रीय कार्यक्रम स्थगित किया गया है। दिल्ली इकाई के अध्यक्ष मारूफ़ रज़ा ने कहा कि राष्ट्रीय स्थापना दिवस कार्यक्रम की मेज़बानी दिल्ली को जंतर मंतर पर करनी थी, दिल्ली इकाई इसे अपने मुख्यालय पर मनाएगी और बाद में सभी राज्यों की भागीदारी के साथ एक सुरक्षित, समावेशी राष्ट्रीय समारोह आयोजित किया जाएगा। यह घोषणा उत्तर प्रदेश (हसीब सिद्दीकी), ओडिशा (मनोज दास), बिहार (प्रमोद दत्ता), त्रिपुरा (बिजॉय पॉल), आंध्र प्रदेश (एन. ईश्वर राव), तमिलनाडु (वी. सेल्विन विनोथ कुमार), कर्नाटक (शांता कुमारी), महाराष्ट्र (पंकज वर्मा), झारखंड (भरत भूषण), तेलंगाना (मामिडी सोमैया), मध्य प्रदेश (सलमान खान), पश्चिम बंगाल (अमित राय), असम (नमिता बोरा) और उत्तराखंड (अरुण शर्मा) की इकाइयों ने की।

रिचा पराशर की शिकायत पर उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और उत्तराखंड के अध्यक्षों ने निष्पक्ष, साक्ष्य-आधारित जाँच की माँग की। आंध्र प्रदेश के एन. ईश्वर राव ने आश्वासन माँगा कि सच बोलने के कारण किसी पत्रकार को प्रतिशोध का सामना न करना पड़े। कर्नाटक की शांता कुमारी ने कहा कि महिला पत्रकार बिना भय के उत्पीड़न की रिपोर्ट कर सकें, यह सुनिश्चित होना चाहिए, और शिकायतों के शीघ्र पंजीकरण, निष्पक्ष एवं संवेदनशील जाँच, साक्ष्य संरक्षण तथा प्रतिशोध, धमकी या चरित्र हनन से कड़ी सुरक्षा की माँग की।

पत्रकार सुरक्षा कानून पर ओडिशा, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के अध्यक्षों ने माँग दोहराई। ओडिशा के मनोज दास ने कहा कि कानून को पत्रकारों को हिंसा, धमकी और प्रतिशोध से बचाना चाहिए, और विशेषकर ज़िलों व ग्रामीण क्षेत्रों से रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा राज्य की प्राथमिकता बननी चाहिए। महाराष्ट्र से मुकेश सेठ ने कहा कि महाराष्ट्र की तरह पत्रकार सुरक्षा कानून राष्ट्रीय स्तर पर भी बनाया जाना चाहिए, और पत्रकारों के लिए वैधानिक ढाँचे की बहाली से हर पत्रकार को आधुनिक कानूनी सुरक्षा, उचित कार्य-स्थितियाँ और पेशेवर गरिमा मिलेगी। तमिलनाडु के वीo सेल्विन विनोथ कुमार ने इस कानून, कार्यरत पत्रकारों के लिए वैधानिक ढाँचे की बहाली और पत्रकारों के राष्ट्रीय रजिस्टर की IFWJ की माँगों की पुनः पुष्टि की।

बिहार के प्रमोद दत्ता और मध्य प्रदेश के सलमान खान ने पत्रकारिता के सभी रूपों को मान्यता देने वाले आधुनिक कानून की माँग की, जिसके तहत डिजिटल, फ्रीलांस और स्वतंत्र पत्रकारों को समान कानूनी सुरक्षा और मान्यता, उचित वेतन और कार्य-स्थितियाँ, नौकरी की सुरक्षा तथा उनकी पेशेवर स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा मिले।

त्रिपुरा, झारखंड और असम ने बिना विवेकाधिकार के बनाए गए पारदर्शी, अधिकार-आधारित रजिस्टर का समर्थन किया। त्रिपुरा के बिजॉय पॉल ने कहा कि इससे सभी मीडिया प्लेटफ़ॉर्मों के पत्रकारों के लिए मान्यता, कल्याण सहायता, बीमा, सुरक्षा उपाय और संस्थागत सहायता सुनिश्चित होनी चाहिए। झारखंड के भरत भूषण ने कहा कि दूरदराज़ और ग्रामीण क्षेत्रों के पत्रकारों को बिना भेदभाव के समान सुरक्षा, बीमा, सुरक्षा उपाय और संस्थागत सहायता मिलनी चाहिए। असम की नमिता बोरा ने कहा कि रजिस्टर में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और स्वतंत्र मीडिया, तथा दूरदराज़ क्षेत्रों के पत्रकार भी शामिल होने चाहिए।

IFWJ का रुख

IFWJ की स्थापना 28 अक्टूबर 1950 को जंतर मंतर पर हुई थी और तब से यह कार्यरत पत्रकारों के अधिकारों, कल्याण और गरिमा के लिए कार्य करता रहा है। केंद्र सरकार को एडवाइज़री और आश्वासनों से आगे बढ़ना चाहिए: व्यापक पत्रकार सुरक्षा कानून बनाए, पत्रकारों की सेवा और वेतन सुरक्षा के लिए वैधानिक ढाँचा बहाल करे और पत्रकारों का राष्ट्रीय रजिस्टर स्थापित करे।


के. विश्वदेव राव

महासचिव

इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ)

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